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कछुआ और खरगोश
The Tortoise and the Hare
पात्र / Characters
कछुआखरगोशवन के जानवर
एक जंगल में एक खरगोश और एक कछुआ रहते थे। खरगोश बहुत तेज़ दौड़ता था और इस पर उसे बहुत घमंड था।
एक दिन खरगोश ने कछुए का मज़ाक उड़ाया, 'तुम इतने धीमे हो! ज़िंदगी में कुछ नहीं कर पाओगे।'
कछुए ने शांति से कहा, 'दौड़ लगाकर देखते हैं।'
सभी जानवर देखने आए। दौड़ शुरू हुई। खरगोश तेज़ी से दौड़ा और कछुए को बहुत पीछे छोड़ दिया।
'कछुआ तो बहुत पीछे है,' खरगोश ने सोचा। 'थोड़ा आराम करता हूँ।' वह एक पेड़ की छाँव में सो गया।
कछुआ धीरे-धीरे लेकिन लगातार चलता रहा। बिना रुके, बिना थके।
जब खरगोश की आँख खुली तो कछुआ जीत की रेखा पार कर चुका था!
सभी जानवरों ने ताली बजाई। खरगोश ने सिर झुकाया।
💡 सीख
धीरे और लगातार चलने वाला जीतता है। घमंड कभी मत करो।
📝 सवाल
खरगोश दौड़ क्यों हार गया?
कछुए की सफलता का राज़ क्या था?
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