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6-8 साल3 मिनट

ईमानदार लकड़हारा

The Honest Woodcutter

पात्र / Characters

लकड़हारानदी की देवी

एक गाँव में एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह रोज़ जंगल से लकड़ियाँ काटता और बेचता था।

एक दिन उसकी लोहे की कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। वह बहुत दुखी हुआ। बिना कुल्हाड़ी के उसका काम नहीं चल सकता था।

तभी नदी में से एक देवी प्रकट हुईं। पहले उन्होंने सोने की कुल्हाड़ी दिखाई और पूछा, 'क्या यह तुम्हारी है?'

लकड़हारे ने कहा, 'नहीं, यह मेरी नहीं है।'

फिर उन्होंने चाँदी की कुल्हाड़ी दिखाई। 'क्या यह तुम्हारी है?'

'नहीं।'

अंत में उन्होंने लोहे की कुल्हाड़ी निकाली। 'यह?'

'हाँ! यही मेरी है!' लकड़हारा खुशी से बोला।

देवी उसकी ईमानदारी से प्रसन्न हुईं और उसे तीनों कुल्हाड़ियाँ दे दीं।

💡 सीख

ईमानदारी सबसे बड़ा गुण है। सच बोलने वाले को अच्छा फल मिलता है।

📝 सवाल

लकड़हारे ने सोने और चाँदी की कुल्हाड़ी क्यों नहीं ली?

देवी ने लकड़हारे को क्या इनाम दिया?

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