हम इतने सारे रंग कैसे देख पाते हैं? आँखें रंग को कैसे पहचानती हैं?
हमारी आँखों के पीछे एक परत होती है जिसे 'रेटिना' कहते हैं। इसमें दो तरह के खास कोशिकाएँ होती हैं।
पहली — 'रॉड्स' — ये अंधेरे में और रात में देखने में मदद करती हैं।
दूसरी — 'कोन्स' — ये रंग देखती हैं। इनकी तीन किस्में होती हैं — लाल रंग के लिए, हरे रंग के लिए और नीले रंग के लिए।
जब रोशनी आँख में आती है, ये कोन्स अलग-अलग मात्रा में सक्रिय होती हैं। दिमाग इन संकेतों को मिलाकर हर रंग पहचानता है।
लाल + हरा + नीला मिलाने से लाखों रंग बन सकते हैं!
मज़ेदार तथ्य: कुत्ते केवल नीले और पीले रंग देख सकते हैं। मधुमक्खियाँ पराबैंगनी (ultraviolet) रोशनी देख सकती हैं जो हम नहीं देख सकते!
घर पर करो: एक कमरे में रोशनी बंद करो। पहले कुछ नज़र नहीं आता। धीरे-धीरे सब दिखने लगता है — क्योंकि रॉड कोशिकाएँ सक्रिय हो जाती हैं। लेकिन रंग नहीं दिखते — क्योंकि कोन्स को ज़्यादा रोशनी चाहिए।