हर साल सर्दियों में परिंदे हज़ारों किलोमीटर उड़कर दूसरे देशों में कैसे पहुँच जाते हैं?
यह पक्षियों का सबसे बड़ा रहस्य है! इसे 'प्रवास' कहते हैं।
पक्षियों के दिमाग में एक प्राकृतिक 'GPS' होता है। वे पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को महसूस कर सकते हैं — जैसे हम कम्पास से दिशा जानते हैं।
पक्षी सूरज की स्थिति, तारों की रोशनी और ज़मीन के नक्शे भी याद रखते हैं।
ये जानकारियाँ उनकी माँ से मिलती हैं — पहली बार उड़ान में वे अपनी माँ के पीछे-पीछे जाते हैं।
भारत में हर साल साइबेरिया से हज़ारों पक्षी आते हैं — जैसे सारस और फ्लेमिंगो।
मज़ेदार तथ्य: आर्कटिक टर्न नामक पक्षी हर साल ७०,००० किलोमीटर का सफर करता है — यह पृथ्वी के दो चक्कर से भी ज़्यादा है!
घर पर करो: एक कम्पास लो और उत्तर दिशा खोजो। फिर सोचो — अगर तुम्हें बिना नक्शे के हज़ारों किलोमीटर जाना हो तो तुम क्या सहारा लोगे?